Thursday, August 25, 2022

वो वीर बेटा (वीर रस पर आधारित)

 
आंधी आईतूफान आये
बादल गरजे घन घन घन
कोड़ों  की बरसात हुई
पर अटल रहा उसका हर प्रण
छिनी उसकी आज़ादी
तिल तिल तड़पाया हर एक क्षण
खून बहा पानी की भाँति
जोखिम हुआ उसका तन मन |

हर एक मार पे की उसने
भारत माता की जय जय कार
हँसता हुआ वो बोला उनसे:
"कभी ना होगी मेरी हार
मैं हूँ भारत मां का बेटा
मेरी जननीमेरा संसार
मुझको  तुम डरा सकोगे
तुम्हारे दिन हैं बस दो चार |

आज़ादी लाऊंगा मैं
वादा है ये मेरी माँ से
ममता का मैं कर्ज भरुंगा
अपने रक्तिम प्राणों से"
गोली चली उसके माथे पर
गिरा धरा पे वो धर से
गूँज उठी जय हिन्द, जय हिन्द 
रेत की हर एक कण-कण से |


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