देश प्रेम है ऐसा प्रेम
जिसमे स्वार्थ नहीं होता
गर्व की अनुभूति होती है
कोई एक तात्पर्य नहीं होता
भेदभाव से परे ये रहता
एकता को करता समर्थक
इसके आगे हर निजी भावना
बन जाती है निरर्थक
Siachen की थरथराती हुई
रगो में बस्ता है ये
कूच की जलती वादियों में
शान से धड़कता है ये
अपनी जान की बाज़ी लगा कर
सीमा पर तैनात जवान
देश प्रेम है उस वीर की
छाती पर विराजमान
हर इंसान जो तिरंगे को देख
अपना शीश झुकाता है
हर वो सक्श जो जन गण सुनकर
गर्व से खड़े हो जाता है
हर वो इंसान जो धर्म से नहीं
मानवता से जीता है जीवन
वो सच्चा देशप्रेमी है
देश पे उसका प्राण अर्पण
जिसमे स्वार्थ नहीं होता
गर्व की अनुभूति होती है
कोई एक तात्पर्य नहीं होता
भेदभाव से परे ये रहता
एकता को करता समर्थक
इसके आगे हर निजी भावना
बन जाती है निरर्थक
Siachen की थरथराती हुई
रगो में बस्ता है ये
कूच की जलती वादियों में
शान से धड़कता है ये
अपनी जान की बाज़ी लगा कर
सीमा पर तैनात जवान
देश प्रेम है उस वीर की
छाती पर विराजमान
हर इंसान जो तिरंगे को देख
अपना शीश झुकाता है
हर वो सक्श जो जन गण सुनकर
गर्व से खड़े हो जाता है
हर वो इंसान जो धर्म से नहीं
मानवता से जीता है जीवन
वो सच्चा देशप्रेमी है
देश पे उसका प्राण अर्पण
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