सोचो अगर इस पृथ्वी में
ना होता कोई दूजा प्राणी
चारो तरफ बस होते मनुष्य
करते हुए अपनी मनमानी
विज्ञान में विषय कम होते
पाठ्यक्रम भी होता सहज
चिड़ियाघर तुम ना जा पाते
जंगल में घूमते बेझिजग
पर पेड़ भी तो है एक प्राणी
पेड़ नहीं तो जंगल कहा?
चारो तरफ रेगिस्तान होता
कैसा अजीब होता ये जहाँ?
पेड़ ही देता स्वच्छ हवा
फल, फूल और छाया
पेड़ो के बिना इस जग की
पलट जाएगी काया
जानवर भी हैं बहुत ज़रूरी
आहार श्रृंखला का अंश
उसके बिना पारितंत्र अधूरा
ख़त्म हो जाएगा मानव वंश
गाये देती दूध हंमे
घोड़े देते हमें सवारी
मुर्गी देती पौष्टिक अंडे
कुत्ते देते वफादार यारी
केंचुए, भवरे, मधुमक्खी भी
देते है अपना सहयोग
इन सबके योगदान से
हम करते जीवन उपभोग
हर एक छोटे बड़े प्राणी की
अपनी भूमिका इस जग में
ये वसुंधरा है अजर
सब प्राणी के संग सहअस्तित्व में
जीव जंतु है एक वरदान
हमेशा करो इनका सम्मान
जियो खुद जीने दो इन्हे
सृष्टि का न करो अपमान
याद रखो हमेशा तुम
इनके बिना तुम हो रिक्त
ध्यान रखो सब जीवों का
इनके साथ तुम विकसित
ना होता कोई दूजा प्राणी
चारो तरफ बस होते मनुष्य
करते हुए अपनी मनमानी
विज्ञान में विषय कम होते
पाठ्यक्रम भी होता सहज
चिड़ियाघर तुम ना जा पाते
जंगल में घूमते बेझिजग
पर पेड़ भी तो है एक प्राणी
पेड़ नहीं तो जंगल कहा?
चारो तरफ रेगिस्तान होता
कैसा अजीब होता ये जहाँ?
पेड़ ही देता स्वच्छ हवा
फल, फूल और छाया
पेड़ो के बिना इस जग की
पलट जाएगी काया
जानवर भी हैं बहुत ज़रूरी
आहार श्रृंखला का अंश
उसके बिना पारितंत्र अधूरा
ख़त्म हो जाएगा मानव वंश
गाये देती दूध हंमे
घोड़े देते हमें सवारी
मुर्गी देती पौष्टिक अंडे
कुत्ते देते वफादार यारी
केंचुए, भवरे, मधुमक्खी भी
देते है अपना सहयोग
इन सबके योगदान से
हम करते जीवन उपभोग
हर एक छोटे बड़े प्राणी की
अपनी भूमिका इस जग में
ये वसुंधरा है अजर
सब प्राणी के संग सहअस्तित्व में
जीव जंतु है एक वरदान
हमेशा करो इनका सम्मान
जियो खुद जीने दो इन्हे
सृष्टि का न करो अपमान
याद रखो हमेशा तुम
इनके बिना तुम हो रिक्त
ध्यान रखो सब जीवों का
इनके साथ तुम विकसित
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